Atal Bihari Vajpayee In Hindi Essay In Hindi



आजादी के बाद हमारे देश में कांग्रेस का 60 सालों तक एक छत्र राज्य रहा. निश्चित रूप से आजादी की लड़ाई में गाँधी, तिलक सरीखे पुराने कांग्रेस नेताओं की सक्रियता का इस पार्टी को लाभ मिला तो भारतीय लोकतंत्र में एक योग्य विपक्ष का ना होना भी कहीं ना कहीं खलता रहा. हालाँकि, कहने को तो बीच में जनता पार्टी की सरकार आई और उससे निकले तमाम नेता कांग्रेस पार्टी के विपक्ष की भूमिका निभाते रहे पर यह कारवां इतना सशक्त नहीं था कि कांग्रेस को एक मजबूत विपक्ष की भांति लंबे समय तक निरंतर चुनौती दे सकता. इसलिए कई बार यह कांग्रेस पार्टी जिसे विश्व की सबसे पुरानी पार्टी होने का गौरव हासिल है वह निरंकुश होती दिखी, तो कालांतर में बेतहासा भ्रष्ट शासन भी इस पार्टी ने ही दिया. छोटे बड़े दल देश में जरूर उभरे, किन्तु वह उतने प्रभावी नहीं हुए, जितना एक सशक्त विपक्ष को होना चाहिए, पर भारतीय जनता पार्टी के रुप में अब देश में एक मजबूत राजनीतिक दल है, जो केंद्र में सत्तासीन होने के साथ-साथ तमाम राज्यों में अपनी जड़ पकड़ चुका है और इस बात का श्रेय अगर किसी एक व्यक्ति को देना पड़े तो वह निश्चित रूप से अटल बिहारी वाजपेई ही होंगे. सबसे लंबे समय तक संसदीय गरिमा का निर्वहन करते हुए माननीय वाजपेई जी विपक्ष की भूमिका निभाते रहे तो दक्षिणपंथी विचारधारा की पोषक के रूप में जानी जाने वाली भाजपा को उन्होंने सर्वग्राही भी बनाया. कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनकी बनाई नींव पर ही आज न केवल मोदी सरकार का भव्य महल खड़ा है, बल्कि आधुनिक भारतीय राजनीति ही उनके दिखलाये रास्तों पर बढ़ी है. तमाम राज्यों में भाजपा की तूती बोल रही है, किन्तु दुर्भाग्य की बात यह भी है कि जैसे-जैसे भाजपा का उभार हो रहा है, कांग्रेस का पतन भी उतनी ही तेजी से होता दिख रहा है. पुनः संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की जगह कमजोर सी दिख रही है, किन्तु इसकी जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी की भ्रष्ट नीतियां कहीं ज्यादा जिम्मेदार रही हैं. खैर, उस विषय पर चर्चा गाहे-बगाहे इधर-उधर होती ही रही है, अभी बात करते हैं भारतीय राजनीति के युगपुरुष अटलजी के बारे में! अटल बिहारी वाजपेई के बारे में इतिहास बेहद सकारात्मक रहेगा, इस बात में दो राय नहीं है. आखिर 24 दलों की गठबंधन सरकार पूरे 5 साल चला पाना वाजपेई जी के ही बस की बात थी, तो उनके व्यक्तित्व का अद्भुत करिश्मा और उनकी अतुलनीय भाषण-शैली का भी इसमें काफी कुछ योगदान था. राजनीतिक पटल पर तमाम लोग आएंगे जाएंगे, कई नेताओं का उद्भव होगा पतन होगा, किंतु आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति में अटल नाम की शाश्वतता को शायद ही नकारा जा सकेगा. Atal Bihari Vajpayee in Hindi, Biography, BJP History, Politics, Essay in Hindi, Great Personalities, Atomic Test in Indian History, Congress downfall, Democracy History in India, Janta Party, Rashtriya Swayamsewak Sangh, Jansangh

राष्ट्रधर्म, राजधर्म और उन सब से बढ़कर व्यवहारिक धर्म की परिभाषा गढ़ने वाले अटल बिहारी वाजपेई का योगदान भारतीय राजनीति में सदा ही अमूल्य ही रहेगा, इस बात में दो राय नहीं! एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार के अध्यापक के पुत्र अटल बिहारी वाजपेई विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के ना केवल प्रधानमंत्री बने, बल्कि विविधता भरे इस देश में उन्होंने सफलतम नेतृत्व भी प्रदान किया, जिससे समाज बंटा नहीं, आपस में लड़ा नहीं, बल्कि समरसता का भाव ही मजबूत हुआ. 25 दिसंबर 1925 को जन्मे अटल बिहारी वाजपेई की शुरूआती शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई. राजनीति विज्ञान में उन्होंने स्नातकोत्तर किया, तो राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन जैसी कालजयी पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया. उत्तम कोटि के कवि अटल बिहारी वाजपेई की कई कविताएं आज भी बड़े शौक से गुनगुनायी जाती हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में राष्ट्रधर्म का पाठ अटल बिहारी वाजपेई ने बखूबी पढ़ा और अपने संपूर्ण राजनीतिक कैरियर में इसे उन्होंने कभी छुपाया भी नहीं! गर्व से कहा कि मैं स्वयं सेवक हूं! यहाँ तक कि जनता पार्टी के दुसरे नेताओं ने जब यह शर्त रखी कि या तो कोई नेता जनता पार्टी से जुड़ा रह सकता है अथवा आरएसएस से तो अटल जी के नेतृत्व में सरकार से निकलने में वाजपेयी जी ने ज़रा भी देरी नहीं की. अपनी जड़ों से कैसे व्यक्ति जुड़ा रहता है इसका उत्तम उदाहरण अटल बिहारी वाजपेई के अतिरिक्त दुसरे लोग कम ही मिलेंगे! आजीवन अविवाहित रहने के निर्णय के फल के रूप में देश सेवा उनका चिरस्थाई विचार रहा, तो अपने ऊपर पदलोलुपता की निकृष्ट विचारधारा को उन्होंने कभी हावी होने नहीं दिया. 7 दशकों से भारतीय राजनीति में अपना स्थान अक्षुण्ण रखने वाले अटल बिहारी वाजपेई के वैचारिक प्रेरणा के श्रोत स्वर्गीय दीनदयाल उपाध्याय एवं डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्रवादी महानुभाव रहे, तो राज धर्म के पथ पर चलते हुए उन्हें भारत सरकार और भारतीय जनमानस दोनों ने भारत रत्न की पदवी से ख़ुशी-ख़ुशी नवाजा. जी हां, ऑफिसियल पुरस्कार तो उन्हें मिला ही, किंतु उस से भी बढ़कर जनमानस के हृदय में उनका स्थान कहीं ज्यादा बड़ा रहा है. यहाँ तक कि विपक्षियों ने भी भारत के संसदीय इतिहास में हमेशा अटल बिहारी का उदाहरण प्रस्तुत किया है. सिर्फ भारतरत्न ही क्यों 1996 में पद्मविभूषण, 94 में लोकमान्य तिलक अवार्ड, 1994 में ही बेस्ट सांसद अवार्ड और पंडित गोविंद बल्लभ पंत अवार्ड अटल बिहारी बाजपेई जी को प्राप्त हुए. इसके साथ 2015 में डी लिट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय) और 2015 में ही 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड' (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त) वाजपेयी जी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया जा सकता है. Atal Bihari Vajpayee in Hindi, Biography, BJP History, Politics, Essay in Hindi, Great Personalities, Atomic Test in Indian History, Congress downfall, Democracy History in India, Janta Party, Rashtriya Swayamsewak Sangh, Jansangh



अपने सात भाई बहनों में सबसे विलक्षण प्रतिभा के धनी अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद तो कभी शादी नहीं की, लेकिन दो बेटियां नमिता और नंदिता को उन्होंने गोद लिया था. यदि उनकी जीवनी को शुरू से देखते हैं तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में भी भारत छोड़ो आंदोलन में बाकी नेताओं के साथ उन्होंने हिस्सा लिया था और जेल भी गए थे. जेल में ही उनकी मुलाकात भारतीय जनसंघ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई थी और यही से उनका राजनीतिक सफर शुरु हो गया था. 1954 में बलरामपुर से वह पहली बार मेंबर ऑफ पार्लियामेंट चुने गए तो 1968 में दीनदयाल उपाध्याय की मौत के बाद जन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए. तत्कालीन समय में नानाजी देशमुख, बलराज मधोक व लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर जन संघ को भारतीय राजनीति में स्थापित करने के लिए अटल बिहारी वाजपेई ने कड़ी मेहनत की. इसी कड़ी में आगे देखते हैं तो 1977 में इंदिरा गाँधी की तानाशाही से परेशान होकर भारतीय जनसंघ और भारतीय लोकदल में गठबंधन हुआ, जिसे जनता पार्टी का नाम मिला और इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के बाद इसे सफलता भी मिली. इस सरकार में अटल बिहारी वाजपेई विदेश मंत्री बने, किंतु जल्द ही जनता पार्टी में बिखराव हुआ और बिखराव के बाद 1980 में लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत जैसे नेताओं के साथ मिलकर अटल बिहारी वाजपेई ने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की. इस सन्दर्भ में आगे वाजपेयी जी का जीवन देखते हैं तो, 1984 में भाजपा को सिर्फ दो सीटें ही मिली थी, किंतु पार्लियामेंट के अगले चुनाव 1989 में भाजपा 88 सीटों पर विजई रही. इसके बाद 1993 में अटल जी संसद में विपक्ष के लीडर बने, तो 1995 में अटल जी को भाजपा का प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित किया गया. 1996 में हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी और अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री भी बने, किंतु 13 दिन में ही अटल जी को पद से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि 1996 से 1998 के दौरान दो बार दूसरी सरकारें बनी लेकिन वह भी गिर गयीं. इसके बाद भाजपा ने दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स यानी एनडीए का गठन किया. भाजपा फिर सत्ता में आई लेकिन इस बार भी दुर्भाग्य से उनकी सरकार 13 महीने ही चली. हालाँकि, उसके बाद बनी अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया. उस दौरान, आर्थिक सुधारों के लिए अटल जी ने बहुत सी योजनाएं शुरु की थी, जिसके बाद छः से सात परसेंट की ग्रोथ दर्ज की गई और समूचे विश्व में भारत का नाम मजबूती से लिया जाने लगा. सत्ता में आने के बाद 1998 में राजस्थान के पोखरण में पांच अंडरग्राउंड न्युक्लियर बम के सफल टेस्ट ने अटल बिहारी वाजपेई की चर्चा पूरे विश्व में फैला दी थी और भारत परमाणु शक्ति संपन्न देशों की अगली कतार में मजबूती से खड़ा हो गया था. तत्पश्चात विश्व के कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबन्ध भी लगाए, किन्तु उन प्रतिबंधों से वाजपेयी जी न तो घबराये और न ही रुके, बल्कि अपना कार्यकाल बीतते-बीतते शेष विश्व को अपनी परमाणु शक्ति के बारे में यह विशवास दिला पाने में सफल रहे कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और वह परमाणु हथियारों का कभी भी पहले प्रयोग नहीं करेगा. Atal Bihari Vajpayee in Hindi, Biography, BJP History, Politics, Essay in Hindi, Great Personalities, Atomic Test in Indian History, Congress downfall, Democracy History in India, Janta Party, Rashtriya Swayamsewak Sangh, Jansangh

यह वही नींव थी, जिसके ऊपर वाजपेयी जी के उत्तराधिकारी डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर के सहयोग की शुरुआत की. आज हम न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में शामिल होने की अंतिम दहलीज पर खड़े हैं, उसका श्रेय माननीय वाजपेयी जी को भी दिया ही जाना चाहिए. विकास की इसी कड़ी में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा शुरू किए गए नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने भारत की आधारभूत संरचनाओं को बदल कर रख दिया और इस तरह से भारतीय जनता पार्टी के भविष्य की राह भी बेहद सुदृढ़ होती चली गई. हालांकि 2004 के चुनाव में भाजपा बाजपेई जी के नेतृत्व में हार गई, किंतु बदलते भारत की कहानी लिखने की प्रेरणा उन्होंने मजबूती से स्थापित कर दी थी. गठबंधन सरकारों को बेहद सफलतापूर्वक चलाने के लिए वाजपेयी जी का कार्यकाल निश्चित तौर पर शोध का विषय है. पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल के लिए भी अटल बिहारी वाजपेई को जाना जाता है, जिसमें दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू करना और परवेज मुशर्रफ, नवाज शरीफ से मुलाकात का जिक्र किया जा सकता है. हालांकि पाकिस्तान ने अटल बिहारी वाजपेई और भारत की पीठ में छुरा ही भोंका और भारत पर कारगिल युद्ध थोप दिया. किंतु, अटल बिहारी वाजपेई के मजबूत नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को एक बार और धूल चटाई और कारगिल की चोटियों से उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. इसके अतिरिक्त सैकड़ों साल से ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए भी अटलजी को जाना जाता है. हालांकि यह विवाद एक बार फिर नए सिरे से शुरु हो गया है. इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर सर्विसेज, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और विद्युतीकरण में गति लाने के लिए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन वाजपेई जी के मुख्य कार्यो में गिनाया जा सकता है. साथ ही साथ उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिए सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत करना, आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त करना, ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बीमा योजना शुरू करना वाजपेई जी के मुख्य कार्यो में सहज ही गिनाया जा सकता है. भारत के तेजस्वी वक्ताओं में गिने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेई का जिक्र तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक उनकी साहित्यिक कृतियों की बात न की जाए. उनकी प्रकाशित कृतियों में मृत्यु या हत्या, अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुंडलिया, संसद में तीन दशक, अमर आग है, कुछ लेख: कुछ भाषण, सेक्युलरवाद, राजनीति की रपटीली राह, बिंदु बिंदु विचार इत्यादि प्रमुख रूप से गिनाई जा सकती हैं तो भारत को लेकर उनकी वह टिप्पणी आज भी राजनीतिक जगत के लिए उतनी ही सामयिक है जिसमें अटल जी ने साफ़ कहा था कि "भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है: ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो." अटल जी के मार्गदर्शन में पैदा और पोषित हुई पार्टी भाजपा अब जवान हो चुकी है और भारत के आधे राज्यों सहित केंद्र में मजबूती से विराजमान भी है, तो देखना दिलचस्प होगा कि अपने मार्गदर्शक अटल जी के भारत के बारे में व्यक्त की गयी "भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त" देश की परिकल्पना कब तक साकार होती है.

हे युगपुरुष! तुमको नमन

सींचा है तुमने नव चमन

दिया तंत्र सच में लोक को

जन जन के तुम आलोक हो

सद्भावना के कर्म फल

अनेकता में भी सफल

समरसता के प्रयत्न हो

तुम सच में ‘भारत रत्न‘ हो

- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'

(25 दिसंबर 2015 को रचित)


- मिथिलेशकुमार सिंह, नई दिल्ली.


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अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी, एक अनुभवी भारतीय राजनीतिज्ञ थे, उन्होंने भारत के 10 वें प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की. उनके प्रधानमंत्रीय कार्यकाल में तीन गैर-लगातार शामिल हैं – 15 दिनों के लिए (16 मई 1996 से 1 जून, 1996 तक), 13 महीने की अवधि (19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक) के लिए, दूसरा और पांचवां वर्ष (13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक).

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी का प्रारंभिक जीवन Early Life of Atal Bihari Vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक मध्यम वर्ग के ब्राह्मण परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम श्रीमती कृष्ण देवी था. अटल बिहारी वाजपेयी के दादा पंडित श्यामलाल वाजपेयी, उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक गांव बटेश्वर से ग्वालियर गए थे. उनके पिता एक स्कूल में मास्टर और एक कवि थे.

अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्वालियर में सरस्वती शिशुमंदिर, गोरखी से अपनी पढ़ाई पूरी की. उन्होंने ग्वालियर में विक्टोरिया कॉलेज से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में स्नातक किया, जिसे अब लक्ष्मीबाई कॉलेज के रूप में जाना जाता है. इसके बाद, उन्होंने डीएवी कॉलेज, कानपुर में अध्ययन किया और एम.ए. में राजनीति विज्ञान में प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की.

उनके करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा उन्हें प्यार से ‘बापजी’ कहा जाता है। वह अपने पूरे जीवन में अकेले रहे और बाद में नामिता नाम की बेटी को अपना लिया. वह भारतीय संगीत और नृत्य पसंद करते हैं अटल बिहारी वाजपेयी प्रकृति के भी प्रेमी हैं और हिमाचल प्रदेश में मनाली उनकी पसंदीदा रिट्रीटस में से एक है.

स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह राजनीति से सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में पागलपन और मधुमेह से पीड़ित होने के लिए जाना जाता है. सहयोगियों का कहना है कि वह लोगों को पहचान नहीं पाते. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चेक-अप के अलावा, वे ज्यादातर घर पर ही रहते हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन Atal Bihari Vajpayee Political Life in Hindi

भारत छोड़ो आंदोलन के समय अगस्त 1942 में राजनीति के साथ उनका पहला मुठभेड़ हुआ. वाजपेयी और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों के लिए  गिरफ्तार किया गया था. और बाद में वह भारतीय जनता संघ में शामिल हो गए, जब 1951 में इसे नवगठित किया गया था, पार्टी नेता श्रीमान प्रसाद मुखर्जी ने उन्हें प्रेरित किया.

1995 में कश्मीर में माना जाता है कि निचले स्तर के इलाज के खिलाफ उन्हें उपवास के रूप में मौत की सजा सुनाई गई थी. इस हड़ताल के दौरान, श्रीमान प्रसाद मुखर्जी का जेल में निधन हो गया. वाजपेयी ने कुछ समय  कानून का अध्ययन किया, लेकिन पाठ्यक्रम पूरा नहीं किया क्योंकि वह पत्रकारिता के प्रति अधिक इच्छुक थे.

उनका चयन इस तथ्य से प्रभावित हो सकता है कि वह अपने छात्र जीवन के बाद से भारत की स्वतंत्रता संग्राम में एक कार्यकर्ता रहे थे. उन्होंने  हिंदी साप्ताहिक पंचजन्य हिंदी माध्यमिक राष्ट्रधर्म; और वीर अर्जुन और स्वदेश जैसे दैनिक समाचार पत्र जैसे प्रकाशनों में संपादक के रूप में कार्य किया. 1951 में, वह भारतीय जनसंघ के संस्थापकों और सदस्यों में से एक थे.

अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा आयोजित पद Posts held by Atal Bihari Vajpayee

1957 में,  उन्हें दूसरे लोकसभा के सदस्य के रूप में चुना गया था.

1957 से 1977 तक, वह संसद में भारतीय जनसंघ के नेता थे.

1962 में, वह राज्यसभा के सदस्य बन गए.

1966 से 1967 तक, वह सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष थे.

1967 में, उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए चौथी लोकसभा के सदस्य के रूप में चुना गया.

1977 में चौथी अवधि के लिए उन्हें 6 वें लोकसभा का सदस्य चुना गया था।

1977 से 1 9 7 9 तक, वह केंद्रीय मामलों के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री थे।

1977 से 1980 तक, वह जनता पार्टी के संस्थापकों और सदस्यों में से एक थे.

1980 में, उन्हें पांचवीं अवधि के लिए 7 वें लोकसभा का सदस्य चुना गया।

1980 से 1986 तक, वह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे.

1980 से 1984 तक, 1986 में और 1993 से 1996 तक, वह संसद में भारतीय जनता पार्टी के नेता थे.

1986 में, वह राज्यसभा के सदस्य बन गए उन्हें सामान्य प्रयोजन समिति का सदस्य बनाया गया था.

1988 से 1990 तक, वह व्यापार सलाहकार समिति और हाउस कमेटी के सदस्य बने रहे.

1990 से 1991 तक, वह याचिकाओं की समिति के अध्यक्ष थे.

1991 में, उन्हें छठे अवधि के लिए 10 वीं लोकसभा का सदस्य चुना गया.

1991 से 1993 तक, वह लोक लेखा पर समिति के अध्यक्ष थे.

199 3 से 1 99 6 तक, वह विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष थे। वह लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे।

1996 में, उन्हें सातवें अवधि के लिए 11 वें लोकसभा का सदस्य चुना गया.

16 मई 1996 से 31 मई 1996 तक उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री के रूप में अपना पहला कार्यकाल दिया.

1996 से 1997 तक, वह लोकसभा में विपक्ष के नेता थे।

1997 से 1998 तक, वह विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष थे.

1998 में, उन्हें आठवें पद के लिए 12 वीं लोकसभा का सदस्य चुना गया।

1998 से 1999 तक, उन्होंने दूसरी बार भारत के प्रधान मंत्री के रूप में सेवा की. वह विदेश मंत्री भी थे और मंत्रालयों और विभागों के प्रभारी थे.

1999 में, उन्हें नौवीं कार्यकाल के लिए 13 वीं लोकसभा का सदस्य चुना गया था.

13 अक्टूबर 1999 से 13 मई 2004 तक, उन्होंने तीसरी बार भारत के प्रधान मंत्री के रूप में सेवा की। वह उन मंत्रालयों और विभागों के प्रभारी भी थे जिन्हें विशेष रूप से किसी भी मंत्री को आवंटित नहीं किया गया था.

अटल बिहारी वाजपेयी की भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भूमिका Atal Bihari Vajpayee as

राजस्थान में पोखरण के रेगिस्तान में मई 1998 में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए गए थे. 1998 के आखिर और 1999 के आरंभ के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ एक राजनीतिक शांति प्रक्रिया शुरू की दशकों पुराने कश्मीर विवाद और कई अन्य संघर्षों को दूर करने के उद्देश्य से, ऐतिहासिक दिल्ली-लाहौर बस सेवा का उद्घाटन फरवरी 1999 में हुआ.

कश्मीर घाटी में आतंकवादियों और पाकिस्तान के गैर-वर्दीधारी सैनिकों की घुसपैठ और उसके बाद सीमावर्ती पहाड़ी पर कब्जा कर लिया गया था और कारगिल के शहर में स्थित पदों को अच्छी तरह से नियंत्रित किया गया. ऑपरेशन विजय भारतीय सेना द्वारा शुरू किया गया था, जो उत्तरी लाइट इन्फैंट्री सैनिकों और पाकिस्तानी आतंकवादियों को वापस खींचने में सफल रहा था, लगभग 70% क्षेत्र वापस ले लिया था.

दिसंबर 1999 में, भारत को एक संकट का सामना करना पड़ा जब इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी 814 को पांच आतंकियों ने अपहरण कर लिया था और अफगानिस्तान में भेजा गया था. उन्होंने बदले में कुछ आतंकवादियों को रिहा करने की मांग की, जिनमें मौलाना मसूद अजहर के नाम भी शामिल थे. अत्यधिक दबाव के तहत सरकार ने तत्कालीन मंत्री जसवंत सिंह को तालिबान शासन अफगानिस्तान में आतंकवादियों के साथ यात्रियों के लिए एक सुरक्षित मार्ग के लिए भेजा था.

वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुधारों को शुरू किया, निजी और विदेशी क्षेत्रों से निवेश को प्रोत्साहित किया और अनुसंधान और विकास को प्रेरित किया.

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मार्च 2000 में भारत का दौरा किया, जो 22 वर्षों में भारत के एक अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी.

एक बार फिर बर्फ को तोड़ने के प्रयास में, वाजपेयी ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को दिल्ली और आगरा में संयुक्त शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था, हालांकि शांति वार्ता सफलता हासिल करने में विफल रही.

संसद को 13 दिसंबर 2001 को एक आतंकवादी हमले का सामना करना पड़ा, जो सुरक्षा बलों द्वारा सफलतापूर्वक संभाला था जिन्होंने आतंकवादियों को मार गिराया.

दशमांश देश का सकल घरेलू उत्पाद रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है, जो कि प्रधान मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 6 से 7 प्रतिशत से अधिक है. देश की अंतर्राष्ट्रीय छवि औद्योगिक और सार्वजनिक अवसंरचना के आधुनिकीकरण से बेहतर हुई है विदेशी निवेश में वृद्धि; आईटी उद्योग में तेजी आई; नई नौकरियों का सृजन; औद्योगिक विस्तार; और बेहतर कृषि फसल

अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी गई पुस्तकें Books written by Atal Bihari Bajpayee

मरिल्क्यवनकवितेम (1995)
मरिल्क्यवनकवितेम हिंदी (1995)
श्रेष्ठ कविता (1997)
नयी दिशा- अलबम जगजीतसिंह के साथट्वेंटी वन पोएम (2003)

अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा जीते गये पुरस्कार Awards won by Atal Bihari Vajpayee

  • 1992 में उन्हें पद्म विभूषण प्राप्त हुआ.
  • 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी. लिट. के साथ सम्मानित किया.
  • उन्हें 1994 में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लाभ पंत पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
  • उन्होंने 1994 में सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार प्राप्त किया.
  • उन्हें 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार दिया गया था.
  • उन्हें 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार – भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
  • बांग्लादेश सरकार द्वारा 7 जून 2015 को उन्हें बांग्लादेश के लिबरेशन वार सम्मान प्रदान किया गया था.
Meri Ekyavan Kavitayen -1995
Na Dainyam Na Palayanam 1998
Values, vision & verses of Vajpayee
A Constructive Parliamentarian 2012
Kya khoya kya paya Atal Bihari Vajpayee : Vyaktitva aur kavitayen 1999
India’s Perspectives on ASEAN and the Asia-Pacific Region 2002
Towards a New World: Defining Moments 2004
Towards a Developed Economy: Defining Moments 2004

कविता पर किताबें और एल्बम Poems

Atal Bihari Vajpayee: Dream for Prosperous India Science & Technology in Nation-building 2016

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